मंगलवार

मैं तो बस कलम चलाता हूँ


गीत और ग़ज़लें नहीं जानता
गद्य पद्य को नहीं मानता
भावों को कहता जाता हूँ
मैं तो बस कलम चलाता हूँ

निर्मल सूर्योदय को जिस दिन देखूं

पवन किरणों से लफ्ज बनाकर
प्रियतमा का चित्र बनाता हूँ
मैं तो बस कलम चलाता हूँ

सावन के मेघों से रंग ले कर

गरजती बिजली संग ले कर
फूलों से रंगता जाता हूँ
मैं तो बस कलम चलाता हूँ

हिमालय की सुन्दरता को

सिन्धु संगम से सजाकर
तस्वीर को महकाता हूँ
मैं तो बस कलम चलाता हूँ

धान के खेतों के पानी में

आँगन की खुशबु को मिलाकर
मीठे मीठे शब्दों से सजाता हूँ
मैं तो बस कलम चलाता हूँ

अर्ध
चन्द्र की उज्ज्वलता को
चंचल कलियों में लगाकर
प्रेम के सुर गाता हूँ
मैं तो बस कलम चलाता हूँ

मुझको क्या मतलब कोरी कविता से

नीरस कवियों की नकली तारीफों से
मैं प्रेम का मोती चाहता हूँ
मैं तो बस कलम चलाता हूँ
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